गर्भाशय में बच्चे का वजन कैसे मापा जाता है?HealthPlanet

Posted on Thu 13th Oct 2022 : 14:06

कई बार जन्‍म के समय शिशु का वजन कम होता है जिसके कारण उसके विकास से संबंधित कई तरह की परेशानियां आती हैं इसलिए शिशु का वजन संतुलित होना बहुत जरूरी है।
जन्‍म के समय शिशु का वजन होना खतरनाक हो सकता है इसलिए प्रेगनेंट महिला को अपनी डाइट और एक्‍सरसाइज की मदद से गर्भ में ही शिशु के वजन को संतुलित कर लेना चाहिए।प्रेगनेंसी में डायट, एक्‍सरसाइज और जीवनशैली में कुछ सकारात्‍मक बदलाव लाने होते हैं जिससे गर्भस्‍थ शिशु का स्‍वस्‍थ विकास हो सके। हर मां चाहती है कि उसका बच्‍चा स्‍वस्‍थ हो और गर्भ में पल रहे शिशु के स्‍वस्‍थ होने का पता उसके वजन से चलता है।
​भ्रूण का वजन कैसे पता चलता है

अधिकतर महिलाएं प्रेग्‍नेंसी की पहली तिमाही में अपना पहला अल्‍ट्रासाउंड करवाती हैं। भ्रूण के विकास को समझने के लिए रेडियोलोजिस्‍ट कई तरह के माप लेते हैं, जैसे कि फेमुर लैंथ, सिर और पेट की चौड़ाई, ओसिपिटोफ्रंटल डायमीटर, बाइपेरिटल डायमीटर और हुमरस लैंथ।

इनके आधार पर भ्रूण का वजन और गर्भावस्‍था का महीना पता चलता है। इससे डिलीवरी की डेट भी पता चलती है।

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