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कई बार जनà¥â€à¤® के समय शिशॠका वजन कम होता है जिसके कारण उसके विकास से संबंधित कई तरह की परेशानियां आती हैं इसलिठशिशॠका वजन संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ होना बहà¥à¤¤ जरूरी है।
जनà¥â€à¤® के समय शिशॠका वजन होना खतरनाक हो सकता है इसलिठपà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को अपनी डाइट और à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ की मदद से गरà¥à¤ में ही शिशॠके वजन को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ कर लेना चाहिà¤à¥¤à¤ªà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में डायट, à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ और जीवनशैली में कà¥à¤› सकारातà¥â€à¤®à¤• बदलाव लाने होते हैं जिससे गरà¥à¤à¤¸à¥â€à¤¥ शिशॠका सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ विकास हो सके। हर मां चाहती है कि उसका बचà¥â€à¤šà¤¾ सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ हो और गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠके सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ होने का पता उसके वजन से चलता है।
​à¤à¥à¤°à¥‚ण का वजन कैसे पता चलता है
अधिकतर महिलाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी की पहली तिमाही में अपना पहला अलà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड करवाती हैं। à¤à¥à¤°à¥‚ण के विकास को समà¤à¤¨à¥‡ के लिठरेडियोलोजिसà¥â€à¤Ÿ कई तरह के माप लेते हैं, जैसे कि फेमà¥à¤° लैंथ, सिर और पेट की चौड़ाई, ओसिपिटोफà¥à¤°à¤‚टल डायमीटर, बाइपेरिटल डायमीटर और हà¥à¤®à¤°à¤¸ लैंथ।
इनके आधार पर à¤à¥à¤°à¥‚ण का वजन और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ का महीना पता चलता है। इससे डिलीवरी की डेट à¤à¥€ पता चलती है।
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